Tuesday, 21 June 2016

विश्व योग दिवस की शुभकामनायें ( सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः )

यदि भारतीय धर्म, दर्शन, अध्यात्म, संस्कृति, संस्कारों, ज्ञान, विज्ञान  को एक शब्द में व्यक्त किया जाय तो वह शब्द है "योग " ...... यह मन को सहज, शांत और अध्यात्म  की तरफ ले जाना वाला भाव और विज्ञान है !! कुछ विपक्ष के मानसिक अवशाद से ग्रस्त लोग बस इसे साँस लेने और छोड़ने की कला मानते हैं, उनको आत्ममंथन करने की जरुरत जरूर है और योग का विरोध करके विपक्ष के लोग  सिर्फ वफादारी और ईमानदारी प्रकट करना चाहता है वो अलग बात है ??!!  योग धर्म, राजनीति व जाति से ऊपर है, मन मस्तिष्क एवं शरीर को स्वस्थ रखने की एक सकारात्मक प्रक्रिया है !! योग केवल शरीर से किया जा सकने वाला एक आसन नहीं बल्कि सकारात्मक ऊर्जा और सोच के साथ जनहित में अपना सर्वस्व समर्पित करना भी एक योग है ........  प्राचीन काल में समुंद्र मंथन से विष अमृत निकले ! वर्तमान परिवेश  में समाज में कई सारी विकृत मानसिकतायें  भर भर के भरी पड़ी है और अगर इससे जुड़कर जिसमे हमारी अच्छाइया और बुराइयां योग मंथन से बाहर निकले तो क्या हर्ज़ है ??  इस भाग दौड़ भरी स्वार्थपूर्ण जिंदगी में मन मस्तिष्क का संतुलन अत्यंत आवश्यक है इसीलिए शारीरिक, मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य वर्धन सिर्फ योग से ही संभव है !  ...... योग को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए भारतीय संस्कृति हमेशा प्रधानमंत्री  मोदी की ऋणी रहेगी क्यूंकि मानव मात्र के कल्याण के लिए विश्व को " सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः " का सन्देश देना जरुरी था  !!